Hyperloop in Hindi | हाइपरलूप क्या है? हाइपरलूप कैसे कार्य करता है?

Hyperloop (हाइपरलूप) क्या है यह जानना बहुत ही जरुरी है क्योंकि Hyperloop सिद्धांत की मदद से आप 700 मील प्रति घंटा तक की रफ्तार से यात्रा कर सकते हैं। आपको किसी एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में मिनटों का समय लगेगा। आइये जानते है हाइपरलूप के बारे में

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हाइपरलूप क्या है? | Hyperloop in Hindi

Hyperloop (हाइपरलूप) तकनीक में एक floating pod का इस्तेमाल किया जाता है जो एक बहुत बड़े कम प्रेशर ट्यूब के अंदर होता है जिसकी मदद से यात्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक सफर कर सकते हैं। हाइपरलूप एक नवीन जमीनी परिवहन का साधन है जो अनेक कंपनियों द्वारा विकसित किया गया है इस तकनीक के अंतर्गत 700 मील प्रति घंटा तक की रफ्तार से यात्री आवागमन कर सकते हैं।

hyperloop in hindi हाइपरलूप क्या है

हाइपरलूप वर्तमान परिवहन के साधनों से किस प्रकार अलग है?

हाइपरलूप तथा वर्तमान रेल परिवहन में दो बड़े अंतर है

पहला Hyperloop (हाइपरलूप) तकनीक में यात्री ट्यूब अथवा टनल से सफर करते हैं जिसमें बहुत सी हवा को उस ट्यूब अथवा टनल से निकाल लिया जाता है ऐसा हवा के घर्षण को कम करने के लिए किया जाता है इसकी मदद से उस ट्यूब अथवा टनल  के अंदर 750 मील प्रति घंटा तक की रफ्तार से यात्रा एक floating pod  की मदद से की जा सकती है।

दूसरा सबसे बड़ा अंतर यह है कि हाइपरलूप तकनीक में ट्रेन अथवा कार के जैसे व्हील का इस्तेमाल नहीं किया जाता है इसमें एक विशेष प्रकार के pods बनाए गए हैं जो हवा में तैरते हुए आगे बढ़ते हैं जिसमें  चुंबकीय बल  का प्रयोग घर्षण को कम करने के लिए किया जाता है।

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हाइपरलूप का क्या लाभ है? Hyperloop Benifits

Hyperloop (हाइपरलूप) तकनीक वर्तमान के परिवहन के साधनों जैसे कार तथा ट्रेन की तुलना में अधिक सस्ती तथा तेज हो सकती है इसके साथ ही इसमें हवाई यात्रा की तुलना में कम प्रदूषण भी होता है। हाइपरलूप तकनीक के समर्थकों का कहना है कि यह वर्तमान पारंपरिक रेल की तुलना में जल्दी तथा सस्ती बनाई जा सकने वाला परिवहन साधन है। हाइपरलूप तकनीक की मदद से हम  दो शहरों के बीच होने वाले परिवहन के भीड़-भाड़ को काफी हद तक कम कर सकते हैं इसके साथ ही वर्तमान परिवहन क्षेत्र की जगह नए आर्थिक क्षेत्र भी विकसित कर सकते हैं।

पहला हाइपरलूप प्रोजेक्ट कब तक उपलब्ध हो सकेगा?

वर्तमान में अनेक कंपनियां हाइपरलूप प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने में लगी हुई हैं परंतु अभी भी हाइपरलूप तकनीक पूर्ण विकसित नहीं हो पाई है। हाइपरलूप  के आगामी 2 से 3 वर्षों में पूर्ण रूप से क्रियान्वित होने की संभावना है तथा अभी इसके शुरुआती trials चल रहे हैं।

भविष्य में हाइपरलूप की सुविधा कहां कहां उपलब्ध हो सकेंगी?

हाइपरलूप प्रोजेक्ट कब तक पूर्ण रूप से विकसित हो सकेंगे अथवा नहीं इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं है परंतु विश्व की अनेक कंपनियों ने हाइपरलूप प्रोजेक्ट के मार्गों का चयन किया हुआ है। जिसमें अमेरिका के अंतर्गत न्यूयार्क से वॉशिंगटन डीसी कान्स शहर से सेंट लुइस तथा भारत में पुणे से मुंबई, विजयवाड़ा से अमरावती तथा अनेक मार्ग शामिल है।

हाइपरलूप का क्या इतिहास है? Hyperloop History

लो प्रेशर वेक्यूम ट्यूब की मदद से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का सिद्धांत बहुत समय पहले से दिया जा चुका था। वर्ष 1984 में दक्षिणी लंदन में क्रिस्टल पैलेस रेलवे द्वारा सबसे पहले एयर प्रेशर की मदद से एक मालगाड़ी को आगे करने तथा वैक्यूम की मदद से पीछे करने का कार्य किया था। इसके साथ ही न्यूमेटिक ट्यूब की मदद से मेल तथा पार्सल को एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग के बीच भेजने का कार्य 19वीं शताब्दी से किया जाता रहा है।

बैंक तथा सुपरमार्केट्स में भी मुद्रा को एक जगह से दूसरी जगह तक इस तकनीक की मदद से भेजा जाता है। हाइपरलूप तकनीक के एक प्रमुख प्रणेता रॉबर्ट गोडार्ड थे जिन्होंने बीसवीं सदी की शुरुआत में इस तकनीक के बारे में अनेक सिद्धांत दिए थे परंतु उनमें उन्हें आवश्यक सफलता नहीं मिल पाई थी।

हाइपरलूप तकनीक वर्ष 2013 में अधिक चर्चा में आई जब प्रसिद्ध उद्यमी एलोन मस्क द्वारा हाइपरलूप अल्फा सिद्धांत प्रदान किया जिसमें उन्होंने बताया कि भविष्य में यह सिस्टम किस प्रकार कार्य करेगा तथा इसकी कीमत कितनी होगी।

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हाइपरलूप अल्फा क्या है?

एलोन मस्क द्वारा हाइपरलूप अल्फा प्रोजेक्ट के माध्यम से बताया कि लॉस एंजेलिस तथा सैन फ्रांसिस्को के मध्य प्रस्तावित हाई स्पीड रेल लिंक की तुलना में हाइपरलूप प्रोजेक्ट काफी सस्ता तथा तेज होगा साथ ही उन्होंने बताया कि उनका हाइपरलूप प्रोजेक्ट काफी सुरक्षित , तेज सस्ता तथा सभी प्रकार के मौसम में भी क्रियान्वित होगा। 

एलॉन मुस्क द्वारा बताया गया कि हाइपरलूप की सेवा उन शहरों के मध्य काफी कारगर साबित होगी जो 1500 किलोमीटर तक  की दूरी पर स्थापित है। इससे अधिक दूरी की स्थिति में सुपर सोनिक एयरट्रैवल तकनीक अधिक कारगर होगी।

हाइपरलूप ट्यूब किस प्रकार कार्य करती है?

हाइपरलूप का मूल सिद्धांत जो एलोन मस्क द्वारा बताया गया वह यह था कि passenger pods अथवा capsule की मदद से यात्रियों को ट्यूब के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान जमीन के नीचे से भेजा जा सकता है इस यात्रा के दौरान घर्षण को कम से कम करने के लिए हवा को ट्यूब में से  पंप के द्वारा निकाल लिया जाएगा।

परिवहन में हवा का घर्षण की समस्या से निपटने में सर्वाधिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। हवाई परिवहन में हवा के घर्षण के प्रभाव को कम करने के लिए हवाई जहाज अधिक ऊंचाई पर उड़ते है क्योंकि ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम हो जाता है। हाइपरलूप तकनीक में कैप्सूल को एक कम किए गए प्रेशर ट्यूब के माध्यम से हवाई जहाज की रफ्तार पर जमीन पर यात्रा करते  हुए दूरी तय की जाती है।

एलोन मस्क दिए सिद्धांत के अनुसार हाइपरलूप ट्यूब के अंदर हवा का दबाव वायुमंडल की तुलना में ⅙ गुना होगा।

हाइपरलूप कैप्सूल किस प्रकार कार्य करेगा?

एलोन मस्क के मॉडल के अनुसार हाइपरलूप कैप्सूल ट्यूब के सतह के ऊपर तैर कर यात्रा करेगा। कैप्सूल को सतह से ऊपर रखने के लिए हाइपरलूप में अनेक सिद्धांत जैसे air skies तथा magnetic levitation आदि का उपयोग किया जा सकता है।

कैप्सूल को अपनी शुरुआती रफ्तार एक बाहरी इलेक्ट्रिक मोटर से मिलेगी जिससे बाद में subsonic गति तक पहुंचा दिया जाएगा जो प्रत्येक 70 मील के बाद कैप्सूल को boost प्रदान करेगी। हाइपरलूप कैप्सूल में 28 यात्री सामान के साथ सफर करेंगे, यात्रियों की संख्या अलग-अलग मॉडल में अलग-अलग भी रखी गई है।

हाइपरलूप को ऊर्जा कहां से प्राप्त होगी?

एलोन मस्क के मॉडल के अनुसार हाइपरलूप कैप्सूल को ऊर्जा सोलर पैनल्स की मदद से मिलेगी जो ट्यूब के ऊपर स्थापित होंगे।

हाइपरलूप हाई स्पीड ट्रेन से किस प्रकार अलग है?

हाइपरलूप के समर्थक यह बताते हैं कि हाइपरलूप हाई स्पीड ट्रेन की तुलना में कम ऊर्जा तथा कम कीमत में कार्य कर सकता है इसके साथ ही हाइपरलूप में लगातार ट्यूब को उर्जा प्रदान करने की आवश्यकता भी नहीं होती है। हाइपरलूप प्रोजेक्ट हाई स्पीड ट्रेन की तुलना में कई गुना रफ्तार से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकते हैं इसमें समय भी कम लगेगा।

हाइपरलूप के माध्यम से यात्रा का अनुभव कैसा रहेगा?

हाइपरलूप के विरोधियों का मानना है कि इस माध्यम से यात्रा करना काफी असुविधाजनक हो सकता है जिसमें यात्रा के दौरान मोड़ों पर अधिक गुरुत्वाकर्षण बल का अनुभव तथा वायुमंडल के दबाव में परिवर्तन से स्वास्थ संबंधी दिक्कत हो सकती है।

भारत में हाइपरलूप का क्या भविष्य है?

भारत में हाइपरलूप के संबंध में अनेक चर्चाएं हैं ऐसा माना जाता है कि एशिया में सर्वप्रथम भारत अथवा सऊदी अरब में हाइपरलूप लांच किया जा सकता है। फरवरी 2018 में वर्जिन हाइपरलूप वन के चेयरमैन रिचर्ड्सन ने घोषणा की थी कि वे महाराष्ट्र में पुणे तथा नवी मुंबई के मध्य हाइपरलूप प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे  बाद इसे कोविड-19 के दौरान टाल दिया गया है।

भारत में नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने बताया था कि भारत में स्वयं के हाइपरलुप को बनाने की क्षमता है परंतु इस तकनीक के भारत में विकसित होने में अभी काफी समय लग सकता है।

हाइपरलूप से जुड़े कुछ सवाल जवाब

हाइपर लूप क्या होता है?

हाइपरलूप एक नवीन जमीनी परिवहन का साधन है जो अनेक कंपनियों द्वारा विकसित किया गया है इस तकनीक के अंतर्गत 700 मील प्रति घंटा तक की रफ्तार से यात्री आवागमन कर सकते हैं।

हाइपरलूप कैसे कार्य करता है?

हवाई परिवहन में हवा के घर्षण के प्रभाव को कम करने के लिए हवाई जहाज अधिक ऊंचाई पर उड़ते है क्योंकि ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम हो जाता है। हाइपरलूप तकनीक में कैप्सूल को एक कम किए गए प्रेशर ट्यूब के माध्यम से हवाई जहाज की रफ्तार पर जमीन पर यात्रा करते  हुए दूरी तय की जाती है।

भारत में हाइपरलूप ट्रैन कब चालू होगी?

भारत में हाइपरलूप ट्रैन कब चालू होगी इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि यह एक सिद्दांत है अभी तक ऐसी कोई भी ट्रैन नहीं बनाई गई है।

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